चीन को चाहिये भारतीय टेलेंट!

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: भारत द्वारा एक साथ 104 उपग्रह छोड़े जाने से चीन अचंभित है. अब तो वहां के सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ का भी मानना है कि चीन ने भारतीय प्रतिभाओं को नज़रअंदाज करके भारी गलती की है. चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के एक समूह द्वारा संचालित इस अखबार ने टिप्पणी की है कि “चीन ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत के हुनरमंद लोगों को यहां काम करने के लिये आकर्षित करने की दिशा में शायद ज्यादा मेहनत नहीं की है.” ग्लोबल टाइम्स ने बकायदा एक लेख “चीन ने भारतीय हुनर को नजरअंदाज करने और अमरीका एवं यूरोप से आने वाले हुनर को ज्यादा अहमियत देने की गलती की है.”

जाहिर है कि देंग के चीन की नज़र में भारतीय प्रतिभाओं को नज़रअंदाज करने का क्या नतीजा हुआ है यह काफी देर से आया है. इससे पहले चीनी लाल सेना यदाकदा भारतीय सीमा करके तनाव बढ़ाने के लिये जानी जाती थी. लेकिन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारतीय दौरे के बाद इसमें कमी आई है तथा भारतीय अखबारों की सुर्खियों से चीन के साथ सीमा विवाद गायब सा हो गया है.


भारत के ‘इसरो’ द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में तहलका मचा देने के बाद चीन के सामने भविष्य को लेकर चुनौती खड़ी हो गई है. कभी ‘लंबी छलांग’ लगाने वाले चीन को भी अहसास हो रहा है कि अंतरिक्ष में उपग्रह छोड़े जाने के मामलें में वो पिछड़ गया है. जिस चीन ने माओ के समय सोवियत संघ पर आरोप लगाया था कि, “अंतरिक्ष में तो उपग्रह छोड़े गये परन्तु जमीन में गिरते हुये लाल झंडे को नहीं संभाला गया है”, को अब देंग की दूसरे पीढ़ी के दौर में समझ में आ रहा है कि अंतरिक्ष विज्ञान की क्या अहमियत है.

दरअसल, कभी ‘लांग मार्च’ तथा ‘सांस्कृतिक क्रांति’ के दौर से गुजर चुके चीन को अब दुनिया के सबसे बड़े मैनुफैक्चरिंग हब के रूप में जाना जाता है. सारी दुनिया में चीन में बने सामानों की तूती बोली जा रही है. ऐसे समय में, भारत द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल करना चीन के भविष्य के ‘बिजनेस’ के लिये खतरा है. अंतरिक्ष में मौसम की जानकारी के लिये, संचार के लिये तथा कई अन्य व्यापारिक गतिविधियों के लिये उपग्रह छोड़े जा रहें हैं. इस क्षेत्र में भारत का आगे निकल जाना इसलिये चीन को रास नहीं आ रहा है क्योंकि अब विदेशी कंपनिया तथा सरकारें अंतरिक्ष में उनके उपग्रह छोड़े जाने के लिये भारत को अपनी मंजिल न बना ले. इससे चीन को अंतरिक्ष व्यापार में भारी नुकसान होगा तथा यही वह कारण है जिसके चलते चीन का सरकारी अखबार भारतीय प्रतिभाओं पर कुर्बान हुआ जा रहा है.

इसीलिये ग्लोबल टाइम्स ने टिप्पणी की है कि, “पिछले कुछ वर्षों में चीन ने तकनीकी नौकरियों में अभूतपूर्व उछाल देखा है क्योंकि देश विदेशी अनुसंधान एवं विकास केंद्रों के लिए एक आकर्षक स्थान बन गया है.” लेख में कहा गया, “हालांकि अब कुछ हाई-टेक कंपनियां अपना ध्यान चीन से हटाकर भारत की ओर लगा रही हैं. इसके पीछे की वजह भारत में श्रमबल की लागत तुलनात्मक रूप से कम होना है. अपनी नवोन्मेषी योग्यता को बरकरार रखने के लिए भारत से हाई-टेक हुनरमंद लोगों को आकर्षित करना चीन के समक्ष मौजूद विकल्पों में से एक हो सकता है.” आश्चर्य नहीं होगा यदि आने वाले समय में चीन, भारत के साथ सीमा विवाद की जगह प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिये ज्यादा तवज्जो देने लगे. यदि ऐसा होता है तो मानना पड़ेगा कि भारतीय प्रतिभाओं ने चीन को उसकी रणनीति बदलने के लिये मजबूर कर दिया है.

फोटो: प्रतीकात्मक

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