370 सीटों पर वोट के आंकड़े गड़बड़

नई दिल्ली | संवाददाता: 2014 में हुये लोकसभा चुनाव के दौरान 370 सीटों पर EVM में गड़बड़ी हुई थी. यह दावा Association For Democratic Reforms यानी एडीआर ने सुप्रीम कोर्ट में किया है. एडीआर ने इसे लेकर एक याचिका में कई गंभीर आरोप लगाये हैं. याचिका 15 नवंबर को दायर की गई है.

एडीआर की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि इस संबंध में जानकारी होने के बाद भी चुनाव आयोग ने कोई भी जानकारी देने से इंकार कर दिया.


याचिका में अदालत से गुहार लगाई गई है कि वो भारतीय चुनाव आयोग को यह निर्देश दें कि किसी चुनाव के परिणाम घोषित करने से पहले वो सटीक डाटा उपलब्ध कराए कि कितने वोट पड़ें. याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी गुहार लगाई है कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में EVM डाटा को लेकर हुई तमाम विसंगतियों की जांच भी कराई जाए.

एडीआर ने साल 2019 में चुनाव आयोग की तरफ से उपलब्ध कराए गए डाटा में त्रुटियां होने की बात कही है. कहा गया है कि 2014 के चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद आयोग की वेबसाइट और उसके ऐप पर जो वोटिंग डाटा उपलब्ध कराए गए थे, उनमें कई बार बदलाव किये गये थे और हो सकता है कि यह बदलाव कमियों को छिपाने के लिए किया गया हो.

याचिकाकर्ता ने कहा कि डाटा में किये गये बदलावों पर आयोग की तरफ से कुछ भी नहीं कहा गया.

अदालत में कहा गया है कि कुल 347 सीटों पर पड़े कुल वोट और ईवीएम में पड़े वोटों की कुल संख्या में अंतर है. ऐसी 6 सीट हैं, जहां वोटों की संख्या प्रत्याशी के जीते गए वोटों की संख्या से भी ज्यादा है. इस तरह लगभग 370 सीटों पर आंकड़ों में हेरफेर की आशंका है.

याचिकाकर्ता ने यूके, फ्रांस, पेरू और ब्राजील जैसे कुछ देशों का उदाहरण देते हुए कहा है कि इन देशों में चुनाव के परिणाम एक तय शुदा अथॉरिटी की जांच-परख के बाद ही घोषित किये जाते हैं. याचिका में भारत में भी इसे लेकर संवेदनशील होने का अनुरोध किया गया है.

द क्विंट की रिपोर्ट से बवाल

इसे लेकर द क्विंट ने पहले ही विस्तार से रिपोर्ट प्रकाशित की थी. जिसके बाद तत्कालीन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओ पी रावत ने कहा था कि पहली नजर में ये मामला बेहद गंभीर लगता है. मुझे अतीत में, और कम से कम मेरे कार्यकाल में ऐसी किसी घटना के बारे में जानकारी नहीं है, जिसमें मतदान किये गए वोटों की संख्या और गिनती की गई वोटों की संख्या में अंतर हो.

EC के आंकड़े कहते हैं कि तमिलनाडु की कांचीपुरम सीट पर 12,14,086 वोट पड़े. लेकिन जब सभी EVMs की गिनती हुई तो 12,32,417 वोट निकले. यानी जितने वोट पड़े, गिनती में उससे 18,331 वोट ज्यादा निकले. कैसे? निर्वाचन आयोग के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं.

निर्वाचन आयोग के मुताबिक, तमिलनाडु की ही दूसरी सीट धर्मपुरी पर 11,94,440 वोटरों ने मतदान किया. लेकिन जब गिनती हुई, तो वोटों की संख्या में 17,871 का इजाफा हुआ और कुल गिनती 12,12,311 वोटों की हुई. EVMs ने ये जादू कैसे किया, EC को नहीं मालूम.

निर्वाचन आयोग के ही आंकड़े के मुताबिक, तमिलनाडु की तीसरी संसदीय सीट श्रीपेरुम्बुदुर के EVMs में 13,88,666 वोट पड़े. लेकिन जब गिनती हुई तो वोटों की संख्या 14,512 बढ़ गई और 14,03,178 पर पहुंच गई. इस चमत्कार का भी EC के पास कोई जवाब नहीं.

EC के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की मथुरा सीट के EVMs में कुल 10,88,206 वोट पड़े, लेकिन 10,98,112 वोटों की गिनती हुई. यानी यहां भी वोटों में 9,906 की बढ़ोत्तरी. कैसे? EC अब भी चुप है.

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