योगी की राजनीति का मतलब

राम पुनियानी
उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत के बाद, पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री के पद पर नियुक्त किया है. योगी आदित्यनाथ ने न तो विधानसभा का चुनाव लड़ा था और ना ही भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें अगले मुख्यमंत्री बतौर प्रस्तुत किया था. योगी की नियुक्ति पर कई विपरीत प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. इसका कारण साफ है. योगी, धर्म के नाम पर राजनीति के आक्रामक पैरोकार हैं. उनके विरूद्ध कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं. उन्होंने नफरत फैलाने वाली कई बातें कही हैं और वे मीडिया में भी स्थान पाती रहीं हैं. लव जिहाद, घर वापसी और गोरक्षा जैसे मुद्दों पर उनके अभियान और भाषण, समाज और मीडिया के एक बड़े तबके को अस्वीकार्य हैं.

भाजपा द्वारा योगी को, अन्य अपेक्षाकृत नरमपंथी नेताओं की तुलना में प्राथमिकता क्यों दी गई, जबकि यह भी साफ है कि योगी ने अपना जनाधार स्वयं निर्मित किया है और यह आरएसएस के जनाधार से भिन्न है. योगी, हिन्दू महासभा की विचारधारा में विश्वास करते हैं, जो कि आरएसएस की राजनीति से मिलती-जुलती तो है परंतु कुछ मामलों में अलग भी है. उन्होंने अपना मुस्लिम-विरोधी रूख कभी नहीं छुपाया. योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने के निर्णय से ऐसा लगता है कि आरएसएस और भाजपा के नेतृत्व का यह मानना है कि चुनाव नतीजों में धार्मिक ध्रुवीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.


विकास के मुद्दों को भी हिन्दुत्व से जोड़ दिया गया और हिन्दुओं को यह संदेश दिया गया कि अगर वे विकास के फल का स्वाद चखने से महरूम रहे हैं तो इसका कारण मुसलमानों का तुष्टिकरण है और यह भी कि केवल भाजपा ही हिन्दुओं का विकास कर सकती है. योगी ने स्वयं कैराना से हिन्दुओं के तथाकथित पलायन को कश्मीर घाटी से पंडितों के पलायन के तुल्य बताया था. भाजपा ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया और चुनाव नतीजों से जाहिर है कि भाजपा की मुस्लिम मतों को बांटने और हिन्दू मतों को एक करने की रणनीति सफल रही है.

योगी की नियुक्ति से यह भी स्पष्ट है कि अब आरएसएस और भाजपा, सांप्रदायिक कार्ड को और खुलकर खेलेंगे. उन्हें मुस्लिम मतदाताओं की कोई ज़रूरत ही नहीं है. उत्तरप्रदेश की लगभग 19 प्रतिशत मुस्लिम आबादी के वोट हासिल करने की भाजपा ने कोई कोशिश ही नहीं की. उनके वोट अखिलेश और मायावती के बीच बंट गए. यह भी साफ है कि संघ और भाजपा अब खुलेआम हिन्दू राष्ट्र का अभियान चलाएंगे. योगी ने स्वयं यह घोषणा की थी कि वे पूरे भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए पहले उत्तरप्रदेश को हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहते हैं. गुजरात कत्लेआम के बाद जब गुजरात को हिन्दू राष्ट्र की प्रयोगशाला बताया जाने लगा, तब भी योगी ने कहा था कि गुजरात के बाद, उत्तरप्रदेश हिन्दू राष्ट्र की प्रयोगशाला बनेगा. आगे पढ़ें

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