माओवादियों ने कहा-हम हिंसावादी नहीं

रायपुर | डेस्क : माओवादियों ने कहा है कि वे हिंसावादी नहीं है.

सुकमा के हमले में 25 जवानों की मौत के बाद माओवादियों ने एक बयान जारी किया है. यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पूरे देश में माओवादियों के हिंसा की आलोचना हो रही है और सीआरपीएफ जवानों के मारे जाने को लेकर लोगों में गहरा आक्रोश है.


माओवादियों की दंडकारण्य ज़ोनल स्पेशल कमेटी के प्रवक्ता विकल्प ने कहा है कि सुरक्षाबल के जवान उनके व्यक्तिगत दुश्मन नहीं हैं और वर्ग शत्रु तो कतई नहीं.

अपने बयान में माओवादी प्रवक्ता विकल्प ने कहा है कि हम हिंसावादी नहीं हैं, लेकिन सामंती शक्तियों, देसी-विदेशी कॉर्पोरेट घरानों का प्रतिनिधित्व करने वाली केंद्र-राज्य सरकारों द्वारा हर पल किए जा रहे हिंसा के प्रतिरोध में और पीड़ित जनता के पक्ष में खड़े होकर अनिवार्यतः हिंसा को अंजाम देने के लिए हम बाध्य हैं.

माओवादी प्रवक्ता ने कहा कि सशस्त्र बलों के जवान व्यक्तिगत तौर पर हमारे दुश्मन नहीं हैं, वर्ग दुश्मन तो कतई नहीं हैं. शोषणमूलक राज सत्ता के दमनकारी राज्य मशीनरी के हिस्से के तौर पर जन दमन के औजार के रूप में वे क्रांतिकारी आंदोलन के आगे बढ़ने के रास्ते में प्रत्यक्ष रूप से आड़े आ रहे हैं. पार्टी, पीएलजीए, जनताना सरकारों और जनता पर हमलों को अंजाम दे रहे हैं, इसलिए अनिवार्य रूप से पीएलजीए के हमलों का शिकार बन रहे हैं.

विकल्प ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा  पिछले साल छत्तीसगढ़ में 9 कामरेड और ओडिशा में 9 ग्रामीणों समेत 21 कामरेडों की निर्मम हत्या की गई थी.  बस्तर के आदिवासी इलाकों की युवतियों के साथ पुलिस-अर्धसैनिक बलों द्वारा यौन शोषण किया गया. इसका ही नतीजा भेज्जी और बुर्कापाल नक्सल हमला है. इस हमले को महिलाओं के सम्मान में हुए हमले के रूप में देखा जाना चाहिए.

बुर्कापाल नक्सल हमले के दौरान जवानों का गुप्तांग काटे जाने की खबरों का माओवादी प्रवक्ता ने खंडन करते हुए कहा है कि हम हमलों में मारे जाने वाले जवानों के साथ अपमानजनक व्यवहार नहीं करते.

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