रमन राज में मृत्युदर में छत्तीसगढ़ नंबर-1

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार में मृत्युदर के मामले में छत्तीसगढ़ पूरे देश में पहले नंबर पर पहुंच गया था. भारत सरकार के जनगणना विभाग की पिछले पखवाड़े आई रिपोर्ट से यह राज खुला है.

छत्तीसगढ़ में भाजपा के 15 साल के शासनकाल में कुपोषण और मृत्युदर के मुद्दों पर लगातार काम करने के दावे किये गये. आदिवासी इलाकों में स्थितियों में सुधार भी आया. खास कर बैगा आदिवासियों के बीच हालत बेहतर हुये हैं.


रमन सिंह के शासनकाल में राज्य सरकार लगातार मृत्यु दर के कम होने के आंकड़े जारी करती रही. लेकिन भारत सरकार के ताज़ा आंकड़ों ने भाजपा शासनकाल के दावों को झूठा साबित कर दिया है. यह आंकड़ा हाल ही में जारी किया गया है.

भारत सरकार के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार भारत में मृत्युदर के आंकड़े पिछले चार दशकों में लगातार कम हुये हैं. 1971 में देश में मृत्युदर 14.9 थी, जो 2017 में घट कर 6.3 हो गई.

अगर 2017 के आंकड़ों की बात करें तो देश में मृत्यु दर के आंकड़े शहरी क्षेत्रों में 5.3 थी. वहीं ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 6.9 था.

देश की बात करें तो मृत्युदर में सबसे बेहतर सुधार नागालैंड में है. यहां यह 3.6 था. वहीं पूरे देश में मृत्युदर सर्वाधिक छत्तीसगढ़ में था. 2017 के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में मृत्युदर 7.5 है.

आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों में मृत्यु दर का यह आंकड़ा 8.2 है. वहीं महिलाओं में यह 6.9 है.

ग्रामीण इलाकों में पुरुषों में मृत्यु दर 8.7 है. जबकि स्त्रियों में यह 7.5 है. इसी तरह शहरी इलाकों में पुरुषों में मृत्यु दर 6.3 है. महिलाओं में यह आंकड़ा 4.9 है.

छत्तीसगढ़ के साथ ही अलग हुये झारखंड में मृत्युदर का यह आंकड़ा 5.5 है. इसी तरह उत्तराखंड में यह 6.7 है. यहां तक कि पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में यह 6.8 है.

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