न्यूटन ने किया सीआरपीएफ को बदनाम

नई दिल्ली | संवाददाता: माओवाद प्रभावित बस्तर में चुनाव को लेकर बनाई गई देश और दुनिया में चर्चित फिल्म ‘न्यूटन’ के खिलाफ दिल्ली की एक अदालत में आपराधिक मामला दर्ज किया गया है. इस मामले में केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन के अध्यक्ष को भी आरोपी बनाया गया है.

आरोप है कि न्यूटन के निर्माताओं ने सीआरपीएफ को खराब तरीके से दिखाया है और जानबूझ कर सीआरपीएफ की छवि को खराब किया गया है. इस फिल्म के खिलाफ स्थानीय अदालत में सीआरपीएफ के उप-निरीक्षक तामल सान्याल ने दायर की है.


गौरतलब है कि न्यूटन फिल्म पिछले साल भारत की ओर से आस्कर के लिये भेजी गई आधिकारिक प्रविष्टि थी. फिल्म की दुनिया भर में प्रशंसा हुई है. इस फिल्म में एक कलर्क की कहानी दिखाई गई थी, जिसे माओवाद प्रभावित बस्तर में चुनाव कराने का जिम्मा दिया जाता है.

आरोप है कि फिल्म के निर्माता मनीष मुंद्रा और उत्पादन कंपनी ड्रिश्यम फिल्म्स के सीईओ शिलादित्य बोरा ने स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने में सीआरपीएफ को बाधक के रुप में पेश किया है.

शिकायतकर्ता का कहना है कि यह न केवल दुर्भावनापूर्ण, अफसोसजनक और झूठ है बल्कि भारत में पूरी चुनाव प्रक्रिया पर संदेह प्रकट किया है. शिकातकर्ता का दावा है कि सीआरपीफ चुनाव में अहम भूमिका निभाती है.

अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी अमित अरोड़ा की अदालत ने मामले की सुनवाई के लिये 1 मार्च की तारीख तय की है.

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