हमारी परंपरा असहिष्णु नहीं तर्कवादी

नई दिल्ली | संवाददाता: राष्ट्रपति ने 68वें गणतंत्र दिवस की बधाई दी है. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने देशवासियों को बधाई दी है. उन्होंने कहा 26 जनवरी, 1950 को हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बना. इसके लिये भारत की जनता ने 15 अगस्त, 1947 से प्रतीक्षा की जब सभी के लिये स्वतंत्रता, समानता तथा लैंगिक और आर्थिक समानता का संविधान सौंपा गया. राष्ट्रपति के संबोधन की मुख्य बातें-

* 1951 में देश की आबादी 36 करोड़ थी जो अब 1.30 अरब की हो गई है. उसके बावजूद प्रति व्यक्ति आय में 10 गुना, साक्षकता दर में 4 गुना तथा जीवन प्रत्याशा दुगुनी हो गई है. गरीबी के अनुपात में दो तिहाई की गिरावट आई है.


* नोटबंदी से कुछ समय के लिये आर्थिक गतिविधि में मंदी आ सकती है. कैशलेस लेनदेन से पारदर्शिता बढ़ेगी.

* गांधीजी ने कहा था, “आजादी के सर्वोच्च स्तर के साथ कठोर अनुशासन और विनम्रता आती है. अनुशासन और विनम्रता के साथ आने वाली आजादी को अस्वीकार नहीं किया जा सकता; अनियंत्रित स्वच्छंदता असभ्यता की निशानी है, जो अपने और दूसरों के लिये समान रूप से हानिकारक है.”

* आज युवा आशा और आकांक्षाओं से भरे हुये हैं. वे अपने जीवन के उन लक्ष्यों को लगन के साथ हासिल करते हैं, जिनके बारे में वे समझते हैं कि वे उनके लिये प्रसिद्धि, सफलता और प्रसन्नता लेकर आयेंगे.

* मेरे एक पूर्ववर्ती ने मेरी मेज पर फ्रेम किया हुआ कथन छोड़ा जो इस प्रकार था: “शांति और युद्ध में सरकार का उद्देश्य शासकों और जातियों की महिमा नहीं है बल्कि आम आदमी की खुशहाली है.” खुशहाली जीवन के मानवीय अनुभव का आधार है.

* हमारी परंपरा ने सदैव ‘असहिष्णु’ भारतीय नहीं बल्कि ‘तर्कवादी’ भारतीय की सराहना की है. सदियों से हमारे देश में विविध दृष्टिकोणों, विचारों और दर्शन ने शांतिपूर्वक एक दूसरे के साथ स्पर्द्धा की है. लोकतंत्र के फलने-फूलने के लिये, एक बुद्धिमान और विवेकपूर्ण मानसिकता की जरूरत है.

* हमारा लोकतंत्र कोलाहलपूर्ण है. फिर भी जो लोकतंत्र हम चाहते हैं वह अधिक हो, कम न हो. हमारे लोकतंत्र की मजबूती इस सच्चाई से देखी जा सकती है कि 2014 के आम चुनाव में कुल 83 करोड़ 40 लाख मतदाताओं में से 66 प्रतिशत से अधिक ने मतदान किया.

* भयंकर रूप से प्रतिस्पर्द्धी विश्व में, हमें अपनी जनता के साथ किए गये वादे पूरा करने के लिये पहले से अधिक परिश्रम करना होगा.

* हमारी अर्थव्यवस्था को अभी भी गरीबी पर तेज प्रहार करने के लिए दीर्घकाल में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि करनी होगी. हमारे देशवासियों का पांचवां हिस्सा अभी तक गरीबी रेखा से नीचे बना हुआ है. गांधीजी का प्रत्येक आंख से हर एक आंसू पोंछने का मिशन अभी भी अधूरा है.

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