रुचिर गर्ग ने लिखी रमन सिंह को चिट्ठी

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह को हिंदी के जाने-माने पत्रकार और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मीडिया सलाहकार रुचिर गर्ग ने पत्र लिख कर कहा है कि वे केंद्र से राज्य को मदद के लिये कहें.

रुचिर गर्ग ने पूर्व मुख्यमंत्री की पत्र की भाषा को लेकर लिखा है कि आपके पत्र की शैली भी सामंती किस्म का आभास देती है. रुचिर गर्ग की यह चिट्ठी सोशल मीडिया पर ख़ूब वायरल हो रही है.


यह रही रुचिर गर्ग की चिट्ठी

सम्माननीय डॉ. रमन सिंह जी,
सादर अभिवादन

मैं सबसे पहले आपके व आपके परिवार के उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूँ. माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के देश को संबोधन के बाद छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी के नाम आपका एक पत्र पढ़ने को मिला. आपका पत्र इस अंदाज में आया है मानो छत्तीसगढ़ सरकार ने कोरोना से निबटने के लिए अब तक कुछ किया नहीं, अब आपने चंद सुझाव दे दिए और शासन को अब काम शुरू कर देना चाहिए! अफसोस इस बात का भी है कि आपके पत्र की शैली भी सामंती किस्म का आभास देती है. छत्तीसगढ़ के एक आम किसान परिवार से आने वाले मुख्यमंत्री को लिखी गई चिट्ठी का यह अंदाज आम छत्तीसगढ़िया को तो खटकेगा डॉ. रमन सिंह जी!

यह पत्र एक संकट के समय आया है. आप खुद देख रहे हैं कि कोरोना के खिलाफ देश भर में राज्य सरकारें, अपने ही संसाधनों से मजबूती से मोर्चा संभाले हुए हैं. छत्तीसगढ़ भी उनमें से एक है. केंद्र सरकार से इस संकट के समय सहायता की सहज अपेक्षा थी, पर वो तो नहीं मिल रही है. मंगलवार को प्रधानमंत्री जी के संबोधन ने भी निराश ही किया. इस बार भी उन्होंने सारी जिम्मेदारी देशवासियों पर डाल दी और किसी बड़े ऐलान, राज्यों के लिए कोई आर्थिक पैकेज, सबसे ज्यादा संकटग्रस्त गरीब नागरिकों या बेरोजगारों के लिए राहत की कोई घोषणा जैसी उम्मीद लगाए बैठे देशवासियों को निराश किया. इस अवसर पर वे लोगों को बता सकते थे कि देश में कोरोना से लड़ने की कैसी तैयारियां सरकार की ओर से की गई हैं, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं बताया. जिस समय छत्तीसगढ़ सरकार और अन्य राज्य सरकारें अपने सीमित संसाधनों से कोरोना का मुकाबला कर रहीं हैं उस समय केंद्र सरकार ने क्या किया? मुख्यमंत्री राहत कोष या कोरोना वायरस के लिए राज्य राहत कोष में दिए जाने वाले दान को मौजूदा नियमों का हवाला देते हुए कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी में शामिल नहीं माना. ऐसा क्या सिर्फ इसलिए कि लोग ‘पीएम केयर्स’ में दान देते रहें और राज्य सरकारें दानदाताओं को तरसें?

संकट के इस समय में बड़े उद्योगपति, व्यावसायिक घराने राज्य सरकारों की बड़ी मदद कर सकते हैं. लेकिन ऐसा लगता है कि सभी को ‘निर्देश’ हैं कि वे सिर्फ पीएम केयर्स में ही दान दें. और तो और राज्य की जनता की ओर से चुने गए भारतीय जनता पार्टी के सांसदों तक ने अपने एमपी लैड का धन राज्य सरकार के सहायता कोष में देने से परहेज किया. आप भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. बतौर नागरिक आप से आग्रह है कि आप केंद्र सरकार को इस बात के लिए राजी करें कि मुख्यमंत्री सहायता कोष या राज्य राहत कोष में दिए जाने वाले दान को कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी में शामिल किया जाए. इससे बड़े उद्योगपति या व्यावसायिक घराने राज्यों की ओर भी मदद का हाथ बढ़ाएंगे. आज जीएसटी की क्षतिपूर्ति, केंद्र के नियमित आबंटन, योजनाओं में केंद्र का हिस्सा जैसी मदद तो मांगने की नौबत ही नहीं आनी चाहिए थी, ऊपर से दानदाता भी राज्यों से दूर रहें तो यह तो अन्याय ही है. राज्य बचेंगे तभी तो देश बचेगा. अपनी चिट्ठी में आपने राज्य सरकार को बहुत से कदम उठाने की सलाह दी है.

छत्तीसगढ़ ने तो केंद्र द्वारा घोषित लॉक डाउन से पहले ही एहतियात बरतना शुरू कर दिया था और अपने ही संसाधनों से इस आपदा के ठोस प्रबंधन के उपाय करने शुरू कर दिए थे. मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों और अधिकारियों की प्रतिबद्ध टीम के साथ कोरोना प्रबंधन की खुद ही निगरानी करते हैं और उसके नतीजे भी सामने हैं. आपने 15 वर्षों तक राज्य का नेतृत्व किया है. आप प्रदेश के संसाधनों को ठीक तरह से जानते हैं. आपसे अपेक्षा है कि आप भी इस संकट की घड़ी में केंद्र सरकार से कहेंगे कि वह छत्तीसगढ़ की जनता की भलाई के लिए कुछ सहायता उपलब्ध करवाए.

सादर!
भवदीय
रुचिर गर्ग

क्या लिखा था रमन सिंह ने

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को चिट्ठी लिख कर उन्हें कई सुझाव दिये थे. उन्होंने कई मांग भी रखी थी.
यह रही डॉ. रमन सिंह की चिट्ठी-

मा. भूपेश बघेल जी,

प्रधानमंत्री जी ने देश के नाम संदेश द्वारा लॉकडाउन 3 मई तक बढ़ाने का निर्णय लिया है. आने वाले दिनों में राज्य में मज़दूरी करने वाले, रोज़ कमाने वाले, वृद्ध और विकलांग हेतु कार्य योजना को आगे बढ़ाना होगा. राज्य में सरकार द्वारा समुचित प्रयास जारी है.

मेरा कुछ सुझाव है:-
1. सामाजिक संगठन, धार्मिक समूहों, राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं का बड़ा योगदान छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन के दौरान रहा है. नगरीय प्रशासन विभाग ने उन्हें इस कार्य से अलग रखे जाने का आदेश जारी किया है. उचित होगा ऐसे संगठन को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ कार्य करने की अनुमति मिले. हज़ारों लोग गुरुद्वारे के लंगर में भोजन कर रहे हैं. अन्य संगठन भी अपने सामाजिक भवन में सेवा कार्य में लगे हैं. एक ही ज़िले राजनांदगांव में 10 से 15 हज़ार लोगों को भोजन, नाश्ता, सूखा खाना बाँटा जा रहा है. इसमें प्रशासन का एक रुपया भी ख़र्च नहीं हो रहा है. सभी ज़िलों में सभी संगठनों को मिलाकर लाखों की संख्या में यह कार्य जारी है. देश के अन्य हिस्सों में एन.जी.ओ. यह कार्य कर रहे हैं. यहाँ भी अनुमति प्रदान करें.

2. छत्तीसगढ़ के मज़दूर अलग-अलग 15 से ज़्यादा राज्यों में 50 हज़ार से 1 लाख तक की संख्या में रुके हैं. तीन मई तक आना संभव नहीं. मज़दूरों को आपदा कोष से उनके खाते में 1 हज़ार तत्काल डालें. मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति बनाकर संबंधित राज्यों से तालमेल बनाकर तीन दिन में इसका निराकरण करें. मज़दूरों को दूसरे राज्य में चावल तो मिल रहा है परंतु दूध, दवाई एवं अन्य सामग्री हेतु तत्काल ज़रूरत है. अभी तक कितने मज़दूरों को अन्य राज्यों में चिन्हांकित कर पैसा भेजा गया, जानकारी सार्वजनिक करें, तत्काल निर्णय लें.

3. हाईकोर्ट ने भी चिंता व्यक्त की है. सभी संभाग में कोरोना के टेस्ट हेतू तत्काल लैब प्रारंभ करें, सभी मेडिकल कॉलेज में यह संभव है.

4. पीपीई किट, टेस्ट किट, वेंटिलेटर हेतु कार्य योजना बनाकर तत्काल ख़रीदी की व्यवस्था करें.

सस्नेह
डॉ. रमन सिंह

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