सोशल मीडिया पर हमें किसे पढ़ना या फॉलो करना चाहिए?

स्वाति अर्जुन | फेसबुक

सोशल मीडिया पर हमें किसे पढ़ना या फॉलो करना चाहिए इसको लेकर #ClarityofMind और #FreedomOfChoice दोनों ही बेहद ज़रूरी है.


मसलन- कोई male colleague/friend/accomplice चाहे कितना भी बड़ा क्रांतिकारी, rationalist या progressive क्यों न साउंड करे, अगर उसके ख़िलाफ़ #Womenharrasment के मामले सामने आ चुके हैं, तो हमें उन्हें सिरे से discard करना चाहिए- हम उनके सोशल कैपिटल बिल्डिंग का हिस्सा या ज़रिया न बनें इसकी पुरज़ोर कोशिश करना चाहिए. (ये male/female) सब-पर लागू होता है.

दूसरी एहतियात (specially for girls), अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें और रोल मॉडल चुनने में भी सावधानी बरतें – इस कूपमंडूक में रहकर ख़ुद को सीमित न करें, हमारे समाज, देश, घर-परिवार, पड़ोस, दुनिया-जहान में ऐसी अनेकानेक औरतें हैं, जो हर दिन एक मिसाल क़ायम कर रहीं हैं, उन सब से कुछ-कुछ अच्छा सीखा जा सकता है.

जिन लोगों ने अपनी निजी ज़िंदगी में सीखने जैसी कोई मिसाल न छोड़ी हो, जिन्होंने वहाँ ख़ुद को exploit, manipulate या display होने से न बचा पायी हों, जो कभी खुद के लिए आवाज़ न उठा पायी हों, जो लोग सिस्टम में रहकर #system के लोगों पर सारे आरोप बग़ैर किसी का नाम लिये करती हों- वहां या उनसे किसी और के सीखने लायक अमूमन कुछ होता नहीं है.

इसलिये ये ज़रूरी है हम अपने रोल-मॉडल्स सोच समझ कर चुनें.

जो लोग ये करने की कोशिश कर पाते हैं, वो असल में ख़ुद को काफ़ी हद तक बचा लेते हैं.

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